दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप

दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप

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भारतीय समाज में अनेक प्रथाएं प्रचलित हें । पहले इस प्रथा के प्रचलन में भेंट स्वरूप बेटी को उसके विवाह पर उपहारस्वरूप कुछ दिया जाता था परन्तु आज दहेज प्रथा एक बुराई का रूप धारण करती जा रही है । दहेज के अभाव में योग्य कन्याएं अयोग्य वरों को सौंप दी जाती हैं । लोग धन देकर लड़कियों को खरीद लेते हैं । ऐसी स्थिति में पारिवारिक जीवन सुखद नहीं बन पाता । गरीब परिवार के माता-पिता अपनी बेटियों का विवाह नहीं कर पाते क्योंकि समाज के दहेज-लोभी व्यक्ति उसी लड़की से विवाह करना पसंद करते हैं जो अधिक दहेज लेकर आती हैं ।
Sant Rampal Ji Maharaj ji ki Dahej Pratha ko khatm karne ki ek Bhumika
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हमारे देश में दहेज प्रथा एक ऐसा सामाजिक अभिशाप है जो महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों, चाहे वे मानसिक हों या फिर शारीरिक, को बढावा देता है. इस व्यवस्था ने समाज के सभी वर्गों को अपनी चपेट में ले लिया है. अमीर और संपन्न परिवार जिस प्रथा का अनुसरण अपनी सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए करते हैं वहीं निर्धन अभिभावकों के लिए बेटी के विवाह में दहेज देना उनके लिए विवशता बन जाता है. क्योंकि वे जानते हैं कि अगर दहेज ना दिया गया तो यह उनके मान-सम्मान को तो समाप्त करेगा ही साथ ही बेटी को बिना दहेज के विदा किया तो ससुराल में उसका जीना तक दूभर बन जाएगा. संपन्न परिवार बेटी के विवाह में किए गए व्यय को अपने लिए एक निवेश मानते हैं. उन्हें लगता है कि बहूमूल्य उपहारों के साथ बेटी को विदा करेंगे तो यह सीधा उनकी अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाएगा. इसके अलावा उनकी बेटी को भी ससुराल में सम्मान और प्रेम मिलेगा |
दहेज कम लाने पर शादी के पश्चात् बहुओं को मारा- पीटा जाता है । यहां तक कि उन्हें जला दिया जाता है । उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया जाता है । प्राचीन काल में स्त्री-पुरुष का प्रणय-बंधन कभी एक पुनीत रीति था । माता-पिता इसे अपना कर्त्तव्य समझते थे । कन्यादान को महादान समझा जाता था । बेटी के विवाह पर कन्या पक्ष के लोग वर पक्ष के लोगों को प्रेम से जो भी उपहार देते थे वर पक्ष उसे स्वीकार करता था ।

कालांतर में उसने दहेज का रूप धारण कर लिया है । आज उस दहेज के नाम पर बड़ी-बड़ी चीजों की मांग की जाती है । दहेज न दे पाने के कारण बारात वापिस ले जाते हैं । लोग आज दहेज मांगने में जरा भी लज्जा महसूस नहीं करते । पैसे वाले लोग अपनी बेटियों के विवाह पर अपार धन खर्च करते हैं । बड़ी-बड़ी चीजें जैसे ए .सी., गाड़ियां, कीमती वस्त्र १ गहने आदि चीजें देते हैं । उसी की देखा – देखी वर पक्ष के लोग गरीब या -मध्यम वर्ग के परिवारों से भी बड़ी- – बड़ी चीजों की मांग करते है । ओज इस प्रथा ने विकराल रूप धारण कर लिया है ।

कन्या को गर्भ में ही मार दिया जाता है । भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, तलाक, वेश्यावृत्ति, बेमेल विवाह जैसी अनेक बुराईयां दहेज प्रथा के कारण हा पनपती हैं । इस कुप्रथा के कारण ही अनेक लड़कियां अविवाहित रह जाती हैं या अयोग्य लोगों के पल्ले बांध दी जाती हैं । कितनी ही लड्‌कियां दहेज के कारण अपने प्राण न्यौछावर कर चुकी हैं और कितनी ही लड्‌कियां अपने माता-पिता पर बोझ बनकर बैठी हैं ।

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